स्वास्थ्य के क्षेत्र में किसी व्यक्ति का योगदान केवल उसके व्यावसायिक कार्य तक सीमित नहीं माना जाता। अध्ययन, अनुसंधान, स्वास्थ्य शिक्षा, जनजागरण, शैक्षणिक सहभागिता तथा समाज में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता विकसित करने के प्रयास भी किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ की पहचान का महत्वपूर्ण आधार होते हैं। बदलते समय में ऐसे विशेषज्ञों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, जो चिकित्सा, शिक्षा और समाज के बीच संवाद स्थापित करने का कार्य करते हैं।
इसी परिप्रेक्ष्य में डॉ. अम्बर पारे का कार्य स्वास्थ्य शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राकृतिक स्वास्थ्य, योग-विज्ञान तथा समग्र स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्रों में उल्लेखनीय माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अध्ययन, अनुसंधान, प्रशिक्षण, सार्वजनिक व्याख्यान, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों तथा शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से स्वास्थ्य विषयों को व्यापक समाज तक पहुँचाने का प्रयास किया है।
डॉ. अम्बर पारे का मानना है कि स्वास्थ्य केवल चिकित्सालयों का विषय नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, व्यक्तिगत अनुशासन और जीवनशैली से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। इसी कारण उनके कार्य का एक महत्वपूर्ण पक्ष स्वास्थ्य शिक्षा को जनसामान्य तक पहुँचाना रहा है। वे समय-समय पर विभिन्न मंचों पर स्वास्थ्य, जीवनशैली, योग, प्राकृतिक स्वास्थ्य, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा समग्र स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करते रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित अनेक वैज्ञानिक सम्मेलनों, शैक्षणिक कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, विशेषज्ञ व्याख्यानों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों में उनकी सक्रिय सहभागिता रही है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों में वैज्ञानिक सोच, स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी तथा संतुलित जीवनशैली के प्रति जागरूकता विकसित करना भी रहा है।
डॉ. अम्बर पारे का कार्य केवल व्यावहारिक स्वास्थ्य मार्गदर्शन तक सीमित नहीं है। वे भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति, भारतीय ज्ञान परंपरा, योग-विज्ञान, चेतना-विज्ञान तथा स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़े विषयों के अध्ययन और अनुसंधान में भी निरंतर सक्रिय हैं। उनका मानना है कि भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य अवधारणाओं का गंभीर अध्ययन आधुनिक स्वास्थ्य विमर्श को नई दिशा दे सकता है। इसी दृष्टिकोण से वे अध्ययन, प्रशिक्षण तथा जनजागरण के विभिन्न माध्यमों के साथ जुड़े हुए हैं।
स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को समय-समय पर विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया गया है। वर्ष 2019 में उन्हें विश्व की प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्था फेलो ऑफ द रॉयल सोसाइटी ऑफ मेडिसिन (एफआरएसएम) की फैलोशिप प्राप्त हुई। यह सम्मान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय शैक्षणिक और व्यावसायिक योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है।
इसके अतिरिक्त डॉ. अम्बर पारे को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स रिकग्निशन, जी-20 सिविल 20 सेवा समिट सम्मान, हेल्थ केयर अवार्ड तथा हेल्थ एक्सीलेंस अवार्ड सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। जी-20 सिविल 20 सेवा समिट सम्मान तत्कालीन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रदान किया गया, जबकि हेल्थ केयर अवार्ड मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा स्वास्थ्य शिक्षा, जनजागरण एवं समाजोपयोगी कार्यों के लिए प्रदान किया गया। ये सम्मान स्वास्थ्य शिक्षा एवं सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उनके योगदान की औपचारिक मान्यता के रूप में देखे जाते हैं।
डॉ. अम्बर पारे की पहचान केवल पुरस्कारों तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित विषयों पर उनका अध्ययन देश-विदेश के लोगों का ध्यान भी आकर्षित करता रहा है। भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, सिंगापुर, मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात, कतर तथा अन्य देशों के लोग भी उनके कार्यों एवं स्वास्थ्य मार्गदर्शन से जुड़े हैं। यह जुड़ाव भारतीय स्वास्थ्य चिंतन के प्रति बढ़ती वैश्विक रुचि को भी रेखांकित करता है।
डॉ. अम्बर पारे स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर केवल परामर्श देने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता को समाज में विकसित करने के उद्देश्य से विभिन्न माध्यमों से निरंतर संवाद भी स्थापित करते हैं। उनका मानना है कि यदि स्वास्थ्य शिक्षा को विद्यालयों, परिवारों और समाज के स्तर पर अधिक प्रभावी बनाया जाए तो अनेक जीवनशैली संबंधी समस्याओं की रोकथाम संभव है। इसी कारण वे स्वास्थ्य शिक्षा को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक आवश्यकता मानते हैं।
सामाजिक उत्तरदायित्व भी उनके कार्य का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। गरीब, दिव्यांग एवं मजदूर वर्ग के लोगों से वे परामर्श शुल्क नहीं लेते। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य जागरूकता, जनहित तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों में भी उनकी सहभागिता निरंतर बनी रहती है।
वर्तमान समय में जब स्वास्थ्य केवल उपचार का विषय न रहकर शिक्षा, जीवनशैली, मानसिक संतुलन, पर्यावरण और सामाजिक जागरूकता से भी जुड़ चुका है, तब ऐसे व्यक्तित्वों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है जो अध्ययन, अनुसंधान और जनजागरण को समान महत्व देते हैं। डॉ. अम्बर पारे का कार्य इसी व्यापक दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ स्वास्थ्य को समाज, शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ जोड़कर देखने का प्रयास किया जाता है।
स्वास्थ्य शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, समग्र स्वास्थ्य जागरूकता तथा अनुसंधान के क्षेत्र में उनका कार्य निरंतर आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न शैक्षणिक मंचों पर उनकी सहभागिता तथा समय-समय पर प्राप्त सम्मान इस बात का संकेत हैं कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में ज्ञान, शिक्षा और जनजागरण की भूमिका भविष्य में और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है।



